स्थिर वैधुतिकी | आवेश का मात्रक

स्थिर वैधुतिकी – भौतिक विज्ञानं की वह शाखा जिसके अंतर्गत स्थिर आवेश तथा आवेशो के गुन्धर्मो का अध्यन किया जाता है स्थिर वैधुतिकी कहलाती है |

विधुत आवेश – यह पदार्थ का वह गुण जिसके कारण वह विधुत तथा चुम्बकीय प्रभाव उत्पन्न करता है अथवा इसका अनुभव करता है |

विधुत आवेश इलेक्ट्रान के स्थानांतरण के कारण उत्पन्न होता है |

आवेशो के प्रकार

आवेश दो प्रकार के होते है

( 1 ) धनात्मक आवेश                            ( 2 ) ऋणात्मक आवेश

घर्षण द्वारा आवेशण

दो वस्तुओ को आपस में रगड़ने पर उनके द्वारा आवेशित होने की प्रक्रिया को घर्षण द्वारा आवेशण  कहते है |

स्पर्श द्वारा आवेशण

जब किसी आवेशित चालक को किसी अनावेषित चालक के संपर्क में लाया जाता है तब दोनों चालको पर समान प्रकृति का आवेश फ़ैल जाता है इस प्रक्रिया को चालन कहते है |

स्थिर वैधुतिकी

प्रेरण द्वारा आवेशण

वह प्रक्रिया जिसके अंतर्गत एक आवेशित वस्तु द्वारा अनावेषित वस्तु पर स्पर्श किये बिना विपरीत प्रकृति का आवेश उत्पन्न कर दिया जाये इसे प्रेरण द्वारा आवेशण कहेंगे |

स्थिर वैधुतिकी

किसी वस्तु को आवेशित करने के लिए केवल इलेक्ट्रान ही उत्तरदायी होता है प्रोटोन नही क्योकि P+ को नाभिक से पृथक करना कठिन हो जाता है |

आवेश की उपस्थिति का पता लगाने तथा मान ज्ञात करने के लिए स्वर्णपत्र विधुतदर्शी, इलेक्ट्रो मीटर, वाल्टमीटर आदि का उपयोग करते है |

स्वर्णपत्र विधुतदर्शी

इस उपकरण की सहायता से आवेश की उपस्थिति का पता लगाया जाता है | कांच का बना एक पत्र होता है जिसके मुह पर एक कुचालक पदार्थ का कॉर्क लगा होता है | इसमें एक धातु की छड उधर्वाधर लटकी हुई होती है तथा इस धातु के निचले सिरे पर दो स्वर्ण पत्तियाँ लगी होती है |

स्वर्णपत्र विधुतदर्शी

जब किसी आवेशित वस्तु को धातु की छड से आवेशित किया जाता है तो आवेश धातु की छड से होता हुआ दोनों स्वर्णपत्र पर पहुँच जाता है दोनों स्वर्णपत्रो पर समान प्रकृति का आवेश उत्पन्न होने के कारण दोनों स्वर्णपत्र एक-दुसरे से प्रतिकर्षण करते है |

दोनों स्वर्णपत्रो का विस्थापन आवेश के परिणाम पर निर्भर करता है | इस प्रकार से इस उपकरण की सहायता से आवेश की उपस्थिति का पता लगाया जाता है |

आवेश का मात्रक

आवेश का S.I. पद्धत्ति में मात्रक “कुलाम” होता है | इसे C से प्रदर्शित करते है |

कुलाम = एम्पियर × सेकंड

1 कुलाम = यदि किसी चालक में 1 AMP की धारा 1 सेकंड तक प्रवाहित हो तो उत्पन्न आवेश 1 कुलाम कहलाता है |

आवेश का C.G.S. पद्धति में मात्रक स्टेट कुलाम या फ्रेंकलीन होता है |

1 कुलाम = 3 × 109 स्टेट कुलाम

आवेश का सबसे बड़ा मात्रक फैराडे होता है |

[ 1 फैराडे = 96500 कुलाम ]

आवेश के अन्य मात्रक

  • 1µc ( माइक्रो कुलाम )             =            10-6 c
  • 1nc ( नेनो कुलाम )                =            10-9 c
  • 1mc ( मिली कुलाम )             =            10-3 c
  • आवेश की विमा = M0L0T1A1

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