प्रकाश का प्रकीर्णन

जब प्रकाश की किरणे किसी स्रोत से निकलकर किसी भी सतह (पृष्ठ) पर गिरती (आपतित) है तो वे किसी किरणे किसी भी दिशा में परावर्तित हो जाती है इस घटना को ही प्रकाश का प्रकीर्णन कहते है।

आसान भाषा में जब कोई किरण किसी सतह से टकराती है तो किरणे बिखर जाती है।

प्रकाश का प्रकीर्णन और रैले का नियम क्या है?

इस नियम के अनुसार जब किसी माध्यम में उपस्थित कणो का आकार प्रकाश की तरंगदैर्ध्य से छोटा होता है तो प्रकीर्णन का मान तरंगदैर्ध्य के चतुर्थघात के समानुपाती होता है।

मतलब

P⋉1/λ4

इस नियम के अनुसार ज्यादा तरंगदैर्ध्य के प्रकाश का प्रकीर्णन कम होता है और कम तरंगदैर्ध्य के प्रकाश का प्रकीर्णन ज्यादा होता है।

Q.

किन रंगो का प्रकाश में सबसे कम और सबसे ज्यादा प्रकीर्णन होता है ?

जैसा की हम जानते है की तरंगदैर्ध्य का बढ़ता क्रम VIBGYOR है।

अतः लाल रंग का प्रकीर्णन सबसे कम और बैंगनी का सबसे ज्यादा होता है।

प्रकीर्णन से जुडी कुछ घटनाये निम्न है

1. आकाश का नीला दिखाई देना – हमारे चारो तरफ वायुमंडल में कई सारे अणु, परमाणु और धूल के छोटे छोटे कण उपस्थित है। और जैसा की हम जानते है की सूर्य के प्रकाश के सात रंग (VIBGYOR) होते है। जब सूर्य का प्रकाश वायुमंडल में उपस्थित छोटे छोटे कणों से टकराता है तो रैले के नियमानुसार नीला रंग का सबसे ज्यादा प्रकीर्णन होता है। अतः हमे आकाश नीला दिखाई देता है।

2. बादलो का सफ़ेद दिखाई देना – कई बार बादलो का रंग हमे सफ़ेद दिखाई देता है ऐसा तब होता है जब प्रकाश वायुमंडल में उपस्थित बड़े कणों से टकराता है तो केवल एक ही रंग का प्रकीर्णन होकर सभी सातो रंगो का प्रकीर्णन होता है जिसके कारण बादल सफ़ेद दिखाई देते है।

3. खतरे के निशान लाल रंग के ही क्यों होते है? ऐसा इसलिए किया जाता है क्यूंकि लाल रंग का प्रकाश की तरंगदैर्ध्य बाकी रंगो की तुलना में अधिक होती है और इसका प्रकीर्णन भी कम होता है इसलिए इसे अधिक दूरी से देखा जा सकता है।


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